Hindi Grammar ( Hindi Vyakaran ) Notes Topics

नमस्कार विद्यार्थियों
आज हम आपके लिए आज की हमारी हिंदी भाषा को समझने के लिए आपके लिए लेकर आये हे। हम आपके लिए हिंदी के व्याकरण लेकर आये हे जो आपके लिए सभी प्रकार के हिंदी के वाक्य और हिंदी के सभी के बारे में सभी प्रकार के प्र्शन को लेकर आपके लिए एक तरह से ये बहुत ही शानदार नोट्स होने वाले हे। हिंदी एक ऐसा विषय हे जिसमे व्याकरण को लेकर देख लीजिये या फिर आपको हिंदी के हर प्रकार के प्र्शन उतर देख लीजिये हर प्रकार से एक बार में हिंदी एक ऐसा विषय हे जिसमे आपको एक एक छोटी छोटी चीजों के बारे में बहुत ही ज्यादा आपके लिए ये हिंदी व्याकरण के नोट्स अच्छे होने वाले हे।

आपके लिए हिंदी एक तरह से भाषा और परीक्षा के एक विषय जैसी हे जिससे की आपको दैनिक जीवन में बहुत ही काम आने वाली हे और वैसे देखा जाये तो हिंदी के विषय को मुश्किल विषय माना जाता हे जिससे की आपको इन नोट्स से बहुत ही सहायता मिलने वाली हे और आपको हर प्रकार से परीक्षा में और हिंदी भाषा में जिससे आपको आसानी से हर परीक्षा को पास करने में सफलता मिले।

ये हिंदी भाषा के इन सभी टॉपिक्स नोट्स जो  हे वो आपके लिए हर छोटी बड़ी एग्जाम में सहायता करने वाली हे क्योकि आपको की पता हे की हिंदी एक ऐसी सब्जेक्ट हे जो सुरु से लेकर अंत तक काम में आती हे मतबल की हर प्रकार की एग्जाम में ।  हमारे द्वारा लायी गयी ये हिंदी भाषा के इन सभी टॉपिक्स नोट्स जिस प्रकार आपके और आपकी सभी सरकारी या फिर प्रिवेट नौकरी के लिए उपयोगी हे वैसे ही और बाकि सभी नोट्स भी आपके लिए बहुत ही सहायक होने वाली हे तो आप उन सभी को भी हमारे यहां से आसानी से डाउनलोड कर सकते हे और अगर आपको अन्य विषय के नोट्स भी चाहिए तो आप हमारे टेलीग्राम चैनल पर भी जाकर ले सकते हे।

Hindi Grammar Notes Topics :-

1. हिन्दी वर्णमाला, विराम चिन्ह
2. शब्द रचना, अर्थ, वाक्य रचना
3. शब्द रूप
4. सन्धि
5. समास
6. क्रियाएं
7. अनेकार्थी शब्द
8. विलोम शब्द
9. पर्यायवाची शब्द
10. मुहावरे एवं लोकोक्ति
11. तत्सम एवं तद्भव, देशज, विदेशी
12. वर्तनी
13. अर्थबोध
14. हिन्दी भाषा में प्रयोग होने वाली अशुद्धियाँ
16. अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
17. रस
18. अलंकार
19. छन्द
20. विशेषण और विशेष्य

Hindi Grammar Topics हिन्दी वर्णमाला, विराम चिन्ह :-

हिन्दी वर्णमाला : पुनर्विलोकन

  • जिन वर्णों का उच्चारण बिना किसी अवरोध के तथा बिना किसी दूसरे वर्ण की सहायता से होता है, उन्हें क्या कहते हैं? – स्वर जिन स्वरों के उच्चारण कम समय लगता है, उन्हें क्या कहते हैं?- ह्रस्व स्वर
  • जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों से अधिक समय लगता है, उन्हें क्या कहते हैं? – दीर्घ स्वर
  • ह्रस्व स्वर हैं- अ, इ, उ, ऋ
  • मूल स्वर हैं- अ, इ, उ, ऋ
  • आगत स्वर हैं- ऑ
  • अग्र स्वर हैं- इ, ई, ए, ऐ
  • मध्य स्वर हैं- अ
  • पश्च स्वर हैं- आ, उ, ऊ, ओ, औ, ऑ
  • संवृत स्वर हैं- ई, ऊ
  • अर्द्ध वृत हैं – इ, उ
  • दीर्घ स्वर हैं- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ

विराम चिह्न :-
विराम का अर्थ है, ठहराव या रुकना। जिस तरह हम काम करते समय बीच-बीच में रुकते और फिर आगे बढ़ते हैं, वैसे ही लेखन में भी विराम की आवश्यकता होती है, अतः पाठक के मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए भाषा में विरामों का उपयोग आवश्यक है। श्री कामता प्रसाद गुरु जी ने विराम चिन्हों को अंग्रेजी से लिया हुआ मानते हैं।  वे पूर्ण विराम को छोड़ शेष सभी विराम चिह्नों को अंग्रेजी से सम्बद्ध करते हैं।

विराम चिह्नों के भेद’ :-

श्री कामता प्रसाद गुरु ने विराम चिह्न बीस बताये हैं, ये है-
1. अल्प विराम (८)
2. अर्द्ध विराम (i)
3. पूर्ण विराम (i)
4. प्रश्न चिह्न (?)
5. “आश्चर्य चिह्न (!) विस्मयादि चिह्न।
6. निर्देशक चिह्न (डैश) (-) संयोजक चिह्न। सामासिक चिह्न।
7. कोष्ठक ( ) [ ] {}
8. अवतरण चिह्न (‘) उद्धरण चिह्न
9. उप विराम (अपूर्ण विराम) (:) इसे श्री गुरु विसर्ग के समकक्ष बताकर मान्यता देने की भी बात करते हैं।
10. विवरण चिह्न (:-)
11. पुनरुक्तिसूचक चिह्न (” “)
12. लाघव चिह्न (0)
13. लोप चिह्न (….., ++++)
14. पाद चिह्न (-)
15. दीर्घ उच्चारण चिह्न (5)
19. तुल्यता सूचक (=)
20. समाप्ति सूचक (-0,−−−)

विराम का अर्थ है- ठहराव

श्री कामता प्रसाद गुरु के अनुसार विराम चिन्हों की संख्या है- (20)
अल्प विराम का चिन्ह है- (,)
अर्द्ध विराम का चिन्ह है- (;)

हंस पद किस विराम का एक और नाम है – त्रुटि विराम
‘राम कहाँ जा रहा है’ इस वाक्य में किस विराम चिन्ह का प्रयोग होगा। – ?

● पूर्ण विराम का प्रयोग किया जाता है- वाक्य के अंत में उप विराम चिन्ह है (:)
● किस विराम चिन्ह का प्रयोग सर्वाधिक होता है- (i) अल्प विराम

उद्धरण चिन्ह का प्रयोग कब किया जाता है? – जब किसी कथन का ज्यों-का-त्यों लिखा जाता है।

संक्षिप्त रूप दिखाने के लिए विराम चिन्ह हैं- (0)

शब्द रचना, अर्थ, वाक्य रचना Hindi Grammar Topics :-

प्रश्न: अक्षर किसे कहते हैं?
उत्तर: वह ध्वनि या ध्वनि समूह जिसका उच्चारण एक साँस या प्रयत्न में होता है, अक्षर कहलाता है।

प्रश्न : शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर : शब्द-एक या अधिक वर्णों से बनी हुई स्वतंत्र सार्थक
ध्वनि को ‘शब्द’ कहते हैं। या निश्चित अर्थ को प्रकट
करने वाले वर्ण-समूह को शब्द कहते हैं।

प्रश्न : रूढ़ शब्द किसे कहते हैं.
उत्तर : जो शब्द एक अर्थ विशेष या वस्तु विशेष के लिये प्रयुक्त हों या जो अपने मूल रूप व्यवहार में लाये जायें। जैसे- कुर्सी, फूल आदि। ‘कुर्सी’ कहते ही हमारे दिमाग में चार पाँव वाली वह चीज, जिस पर बैठा जा सकता है, घूम जाती है।

प्रश्न : यौगिक शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर :वे शब्द जो दो या अधिक शब्दों के योग से बने हों, उन्हें यौगिक शब्द कहते हैं। जैसे-हिम + आलय हिमालय, = प्रधान + मंत्री = प्रधानमंत्री।

प्रश्न : योगरूढ़ शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर : जो शब्द दो शब्दों के मेल से तो बने हैं परन्तु किसी अन्य अर्थ विशेष का बोध करवाते हैं, एक निश्चित अर्थ के लिए प्रयुक्त होते हैं, उन्हें योगरूद शब्द कहते हैं।
उदाहरणार्थ- चारपाई अर्थात् चार पाये हैं जिसके। यहाँ चारपाई का अर्थ खाट से है न कि गाय, कुर्सी आदि से। इस प्रकार इन शब्दों में योग भी हुआ और निश्चित अर्थ
रूढ़ भी हो गया।

प्रश्न : समासरूव प्राब्द किसे कहते हैं?
उत्तर : जो शब्द किसी दूसरी भाषा से स्वीकार कर लिये गये, जैसे- कैंची, बटन, तोप, कागज आदि। कुछ तो ज्यों के त्यों ले लिये गए, जैसे– कागज, ऑफ़िस आदि। कुछ को हिन्दी की प्रकृति के अनुरूप ढाल लिया गया, जैसे- जमीन, त्रासदी आदि।

प्रश्न : देशी शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर : स्थानीय बोलियों या उपभाषाओं से आये क्षेत्रीय शब्द देशी या देशज शब्द कहे जाते हैं, जैसे ढूंढ़ना, खाट आदि।

प्रश्न : संकर शब्द किसे कहते हैं?
उत्तर : जैसा कि नाम से ही स्पष्ट हो गया है कि दो भाषाओं के मिश्रण से बने शब्द संकर कहलाते हैं, जैसे: रेलगाड़ी रेल (अंग्रेजी) गाड़ी (हिन्दी), जाँचकर्ता-जाँच (हिन्दी) कर्ता (संस्कृत) ।

व्याकरणिक प्रकार्य के आधार पर शब्द भेद शब्द के निम्नलिखित आठ भेद हैं-
चार विकारी शब्द
1. संज्ञा
2. सर्वनाम
3. विशेषण
4. क्रिया
चार अविकारी शब्द
5. समुच्चयबोधक
6. क्रियाविशेषण
7. सम्बन्धबोधक
8. विस्मयादिबोधक

शब्द रूप Hindi Grammar Topics :-

उपसर्गों की संख्या :- संस्कृत उपसर्ग ( 19 )
(1) अति- बाहुल्य (अधिक, उस पार)
(2) अधि- सामीप्य, ऊपर, श्रेष्ठ
(3) अनु- पीछे, साथ, समान
(4) अप- दूर, हीनता, विरुद्ध
(5) अभि- ओर, सामीप्य
(6) अव-दूर, नीचे
(7) आतक, कम, इधर
(8) उत्, उद्- ऊपर, उन्नति
(9) अप- निकट, सहायक, छोटा
(10) दुः दुर्, दुश, दुष, दुस्- बुरा, कठिन
(11) नि- नीचे, भीतर
(12) निः निस्, निर्- बिना, बाहर, निषेध
(13) परा- पीछे, उलटा,
(14) परि चारो ओर
(15) प्र- अधिक, आगे
(16) प्रति- ओर, उलटा, विरोध, प्रत्येक
(17) वि- बिना, अलग, विशेषता
(18) सम्- पूर्ण, अच्छी तरह, संयोग
(19) सु- अच्छा, सुन्दर, सहज

हिंदी उपसर्ग- (10)
(1) अ-अन-रोकना, मना करना
(2) अध-आधे, अपूर्ण
(3) ऊन- एक कम
(4) औ (अव) मना करना
(S) दु- हीन, बुरा
(6) नि- अभाव, विशेष, निषेध
(7) बिन- निषेध
“(8) भर- ठीक पूरा
(9) कु (क)- बुरा, हीन
(10) सु (स) – श्रेष्ठ साथ

| विशेष टिप्पणी-हिंदी में कुछ व्याकरण लेखक ‘क’ और ‘स’ क्रमशः नवें और दसवें (कु एवं के विकार) को अलग | मान-कुल बारह उपसर्ग बताते हैं, परन्तु इन दोनों को
| अलग उपसर्ग नहीं माना जाना चाहिए।

उर्दू उपसर्ग-( 19 )
(1) अल (अरबी)- निश्चित
(2) ऐन- ठीक, पूरा
(3) कम- थोड़ा, हीन
(4) खुश- अच्छा, शुभ
(5) गैर- भिन्न, विरुद्ध
(6) दर में
(7) ना- अभाव
(8) फ़िल्में, फी (अरबी) में प्रति
(9) ब- अनुसार, में, से ओर
(10) बद- बुरा, अशुभ
(11) बर- ऊपर, पर
(12) बा साथ, अनुसार
(13) बिल (अरबी) -साथ, से, में
(14) बिला (अरबी) – बिना

 

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