Calendar Reasoning Notes Free In Hindi

आज की इस पोस्ट में हम सभी विद्यार्थियों के लिए लेकर आये हे रीजनिंग विषय का सबसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स कैलेंडर के नोट्स (Calendar Reasoning Notes) जो की आपकी एग्जाम में आने वाले रीजनिंग के प्रशनो के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होने वाले हे तो आप इन कैलेंडर रीजनिंग नोट्स ( Calendar Reasoning Notes In Hindi ) को ध्यान से पढ़े और फिर दिए गए प्र्शन को हल करे।

कैलेंडर एक ऐसा रीजनिंग का टॉपिक हे जिसमे पूछे जाने वाले प्र्शन बहुत ही ज्यादा इम्पोर्टेन्ट होते हे और उनको सरल करने के लिए किसी ना किसी प्रकार की ट्रिक या फिर किसी प्रकार के तरिके को उपयोग कर के फिर इनको हल किया जाता हे तो आप यह दिए हुए ये कैलेंडर रीजनिंग के नोट्स को ध्यान से पढ़े और सभी प्रकार केकैलेंडर रीजनिंग नोट्स के संबधित प्रश्नो को आसानी से हल करो।

आज कल सभी प्रकार की सरकारी परीक्षा में रीजनिंग के प्र्शन पूछे जाते हे तो आपको इन कैलेंडर रीजनिंग नोट्स ( Calendar Reasoning Notes In Hindi ) में आपको सभी प्रकार के वर्ष , सभी प्रकार के दिन और वार के बारे में बताया जायेगा जिसमे आपको प्रशनो को सरल करने के लिए सूत्र और हर प्रकार से आपको समझाया जायेगा तो आप इन कैलेंडर रीजनिंग नोट्स नोट्स को अच्छे से तैयार करे और अपनी परीक्षा की तैयारी अच्छे से करे।

Calendar Reasoning Notes Important Point:-

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कैलेण्डर से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। कैलेण्डर दिन, महीना एवं वर्ष के बीच आपसी सम्बन्ध को प्रदर्शित करता है। पोप ग्रेगॉरी ने ईसा मसीह के जन्मदिन 1 जनवरी सन् 1 को सोमवार मानते हुए कैलेण्डर की शुरुआत की थी। कैलेण्डर से संबंधित प्रश्नों को हल करते समय निम्न महत्त्वपूर्ण तथ्यों का ध्यान
रखना चाहिए।

1. सामान्य वर्ष ऐसे वर्ष कहलाते हैं जिनमें 4 का पूरा-पूरा भाग नहीं जाता है। जैसे, 1993, 2001, 2003, 2007, 2009, 2013 आदि। इसके विपरीत जिस वर्ष में 4 का पूरा-पूरा भाग चला जाता है, उसे लीप वर्ष कहते है।

जैसे- 2000, 2004, 2008, 2012 आदि। एक सामान्य वर्ष में 365 दिन ( 52 सप्ताह 1 दिन) होते हैं, जबकि अधिवर्ष (या लीप वर्ष) में 366 दिन (52 सप्ताह 2 दिन) होते हैं। लीप वर्ष में फरवरी के माह में 28 की जगह 29 दिन होते हैं, जैसे 2000, 2004, 2008, 2012 आदि लीप वर्ष हैं।

2. सामान्य वर्ष में किसी निश्चित तिथि का दिन अगले वर्ष अपने पिछले वर्ष की तुलना में एक दिन बढ़ जाता है जबकि पिछले में वर्ष में जाने के लिये 1 दिन पीछे आना होता है। जैसे यदि 1 जनवरी 2010 को सोमवार था तो 1 जनवरी 2011 को मंगलवार, (+1 दिन) और 1 जनवरी 2009 को रविवार (-1 दिन) होगा।

3. एक समूह में 7 दिन एवं एक पखवाड़े में 15 दिन होते हैं। वर्ष में जनवरी, मार्च, मई, जुलाई, अगस्त, अक्टूबर एवं दिसंबर माह 31 दिन के होते हैं। अप्रैल, जून, सितंबर एवं नवंबर माह 30 दिन के होते हैं। फरवरी सामान्य वर्ष में 28 की एवं लीप वर्ष में 29 दिन की होती है।

Year Point Of Calendar Reasoning Notes :-

4. एक सामान्य वर्ष से अगले लीप वर्ष में जाने पर लीप वर्ष में किसी निश्चित तिथि का दिन अपने पिछले सामान्य वर्ष की तुलना में दो दिन बढ़ जाता है। यह नियम मार्च से दिसम्बर माह तक लागू होता है। जैसे यदि 1 अप्रैल 2007 (सामान्य वर्ष) को, सोमवार था तो 1 अप्रैल 2008 (लीप वर्ष) को बुधवार (सोमवर+2 दिन) होगा।

यह नियम माह जनवरी, फरवरी में लागू नहीं होता है। इन दो माह में यह सामान्य वर्ष की तरह लीप वर्ष के दौरान भी एक दिन ही बढ़ता है। जैसे यदि 1 जनवरी 2007 को शुक्रवार था तो 1 जनवरी 2008 को शनिवार (शुक्रवार+1 दिन) होगा। यहाँ लीप वर्ष का प्रभाव नहीं आयेगा।

5. एक लीप वर्ष से सामान्य वर्ष में जाने पर लीप वर्ष के जनवरी, फरवरी माह में किसी निश्चित तिथि के दिन से अगले सामान्य वर्ष में उसी तिथि को दो दिन बढ़ जाते हैं। जैसे यदि 1 जनवरी 2008 (लीप वर्ष) व रुवार है तो 1 जनवरी 2009 (सामान्य वर्ष) को शनिवार (+2 दिन) होगा। यह नियम मार्च से दिसम्बर में लागू नहीं होता है। इन महीनों में यह सामान्य वर्ष की तरह एक दिन ही बढ़ता है। जैसे यदि 1 अप्रैल 2012 को बुधवार था तो 1 अप्रैल 2013 को गुरुवार (+1 दिन) होगा।

6. ऐसे शताब्दी वर्ष जो 400 से पूर्णरूप से विभाज्य नहीं होते हैं परन्तु लीप वर्ष हैं तो भी उनमें किसी निश्चित तिथि का दिन अपने पिछले सामान्य वर्ष की तुलना में एक दिन ही बढ़ता है। जैसे वर्ष 100, 200, 300, 5001900, 2100 आदि।

7. किसी सामान्य वर्ष का पहला दिन 1 जनवरी एवं अंतिम दिन 31 दिसम्बर का वार समान होते हैं, जैसे यदि 1 जनवरी 2011 को सोमवार है तो 31 दिसम्बर, 2011 को भी सोमवार होगा।

8. किसी लीप वर्ष में वर्ष के पहले दिन (1 जनवरी) की तुलना में वर्ष के अंतिम दिन (31 दिसंबर) का वार एक दिन बढ़ जाता है, जैसे यदि 1 जनवरी 2012 को मंगलवार है तो 31 दिसम्बर 2012 को बुधवार होगा।

9. किसी दिन में 7 या 7 के गुणक जैसे 14, 21, 28 आदि दिन जोड़ने या घटाने परदिन आता है, जैसे यदि 10 जनवरी को सोमवार था तो 17 जनवरी (+7 दिन) 24 जनवरी (+14 दिन) एवं 3 जनवरी (-7 दिन) को भी सोमवार होगा। 10. किसी शताब्दी का प्रथम दिन (1 जनवरी) सोमवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार हो सकता है परन्तु बुधवार, शुक्रवार, रविवार नहीं होता है। इसी प्रकार किसी शताब्दी का अंतिम दिन (31 दिसम्बर) बुधवार, शुक्रवार, रविवार हो सकते है परन्तु
सोमवार, मंगलवार, गुरुवार, शनिवार नहीं होते है।

Month Point Of Calendar Reasoning Notes:-

11. समान कैलेण्डर वाले माहः समान कैलेण्डर वाले महीने वे होते हैं जिनका कैलेण्डर (अर्थात् तिथियाँ एवं वार) समान होता है अर्थात् इनमें विभिन्न तिथियों के वार समान होते हैं। जैसे 1 जनवरी को सोमवार हो तो 1 अक्टूबर को भी सोमवार होगा। ये समान कैलेण्डर माह निम्म्र होते हैं-
साधारण वर्ष में
1. जनवरी = अक्टूबर
2. फरवरी मार्च – नवम्बर
3. अप्रैल – जुलाई
4. सितम्बर – दिसम्बर
लीप वर्ष में
1. जनवरी – अप्रैल
2. अप्रैल – जुलाई
3. फरवरी – अगस्त
4. मार्च = नवम्बर
5. सितम्बर – दिसम्बर

12. विषम दिन: कैलेण्डर की दो तारीखों के बीच आने वाले दिनों की संख्या में 7 का भाग देने पर जो शेषफल रहता है, उसे विषम दिन कहते हैं। विषम दिन 0,1,2,3,4,5 एवं 6 हो सकते हैं। जो विषम दिन की संख्या है। अभीष्ट वार या तिथि ज्ञात करने हेतु इन विषम दिनों को दिये गये दिन/तिथि में जोड़कर या घटाकर अभीष्ट तिथि या वार
ज्ञात कर सकते हैं।

13.कैलेण्डर में निर्धारित तिथि ज्ञात करने हेतु यदि प्रश्न में ‘के बाद’ शब्द प्रयुक्त किया गया हो तो दिये गये समय में एक ओर जोड़ लेते है तथा फिर अभीष्ट तिथि/वार ज्ञात करते हैं। जैसे यदि पूछा गया है कि 12 जनवरी, 2011 के ‘5 दिन बाद’ कौनसी तिथि होगी तो उत्तर होगा 12 जनवरी +5+1 = 18 जनवरी, 2011

14. यदि प्रश्न में ‘के पहले’, ‘से पहले’ या ‘से बाद’ शब्द दिये हों तो दी गई तिथि में केवल दिया गया समय ही जोड़ना या घटाना होता है। उदाहरणार्थ- 12 दिसम्बर, 2012 से 3 दिन बाद कौनसी तिथि होगी। इस प्रश्न का उत्तर होगा 12 दिसंबर+3 = 15 दिसंबर, 2012. इसी प्रकार यदि पूछा जाए कि 24 सितम्बर के 7 दिन पहले कौनसी तारीख थी तो उत्तर होगा 24 सितंबर-7 = 17 सितंबर।

Day Calculations Of Calendar Reasoning Notes:-

15. जब एक ही वर्ष में भिन्न-भिन्न महीनों की तिथियों संबंधित वार ज्ञात करने हो तो साधारण/लीप वर्ष को ध्यान में रखते हुए दी गई तिथियों के कुल दिनों की गणना कर लेते हैं, फिर उसमें 7 का भाग देकर शेष बचे दिनों की संख्या ज्ञात करते हैं। यह शेष दिन विषम दिन कहलाते हैं। विषम दिन को दिये गये वार/ तिथि में जोड़कर या घटाकर अभीष्ट वार/तिथि ज्ञात कर लेते हैं।

उदाहरणार्थ- यदि वर्ष 2009 में गणतंत्र दिवस सोमवार को मनाया गया तो उसी वर्ष नेहरूजी का जन्मविस (14 नवम्बर) किस वार को मनाया जाएगा। इस प्रश्न का उत्तर ज्ञात करने हेतु हमें 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) एवं 14 नवम्बर तक के दिनों की संख्या ज्ञात करनी होगी,

वह होगी जनवरी 5 + 28 फरवरी के + 31 मार्च के + 30 अप्रैल के + 31 मई के + 30 जून के + 31 जुलाई के + 31 अगस्त + 30 सितंबर + 31 अक्टूबर के + 14 नवम्बर के = 292 दिन। अब 292 में 7 का भाग देकर शेषफल ज्ञात करेंगे। 292 : 7 शेषफल = 5 दिन। अब 5 दिन को 26 जनवरी के दिन सोमवार में जोड़कर अभीष्ट उत्तर प्राप्त करेंगे। अतः नेहरूजी का जन्म दिवस होगा सोमवार + 5 = शनिवार को।

16. जब भिन्न-भिन्न वर्षों के लिए एक वर्ष की तिथि/वार दी होने पर किसी अन्य वर्ष की तिथि या वार ज्ञात करना हो तो दोनों तिथियों के बीच कुल दिनों की संख्या ज्ञात करते समय बीच के लीप वर्षों का ध्यान रखना होता है। लीप वर्ष में किसी निर्धारित तारीख पर आने वाला दिन अपने पूर्व में आने वाले सामान्य वर्ष की तुलना में 2 दिन आगे बढ़ जाता है।

इसके विपरीत सामान्य वर्ष में एक तिथि को आने वाला वार अपने पिछले वर्ष की उसी तिथि के वार से केवल 1 दिन ही आगे बढ़ता है। उदाहरणार्थ यदि 2 मार्च, 2007 को शुक्रवार था तो 2 मार्च, 2008 को कौनसा दिन होगा? वर्ष 2008 एक लीप वर्ष है तथा 2007 एक सामान्य वर्ष। अतः सामान्य वर्ष
से लीप वर्ष में जाने पर (मार्च से दिसंबर) उसी तिथि का वार 2 दिन आगे बढ़ जाता है। अत: 2 मार्च 2007 को शुक्रवार था तो 2 मार्च 2008 को शुक्रवार +2 – रविवार होगा।

Date Of Birth Calculations Of Calendar Reasoning Notes:-

17. कैलेण्डर से संबंधित ज्ञान के परीक्षण हेतु जन्म तिथि पर आधारित प्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। जन्म तिथि पर आधारित प्रश्नों में दो या अधिक व्यक्ति किसी की जन्म तिथि के बारे में भिन्न-भिन परंतु अनुमानित जानकारी प्रदान करते हैं। सभी की संभावित सूचनाओं का संकलन एवं विश्लेषण कर व्यक्ति की सही जन्म तिथि/वार का निर्धारण किया जाता है।

उदाहरणार्थ- सेजल की मम्मी ने बताया कि सेजल 19 जून से 24 जून के बीच पैदा हुई थी। सेजल के पापा का कहना है कि वह 16 जून से 23 जून के बीच पैदा हुई थी, जबकि स्वयं सेजल को याद है कि वह 21 जून के बाद परंतु 25 जून के पहले जन्मी थी। इस सूचना के आधार पर सेजल की सही जन्म तिथि का निर्धारण निम्र प्रकार कर
सकते हैं- विभिन्न व्यक्तियों के अनुसार सेजल की जन्म तिथि- सेजल की मम्मी- 20, 21, 22, 23, जून सेजल के पापा- 17, 18, 19, 20, 21, 22 जून सेजल 22, 23, 24, जून उक्त तीनों के अनुमानों में 22 जून ऐसी तिथि है जो कॉमन है। अत: स्पष्ट है कि सेजल का जन्म 22 जून को हुआ।

18. दी गई निश्चित तिथि का वार ज्ञात करनाः दी गई निश्चित तिथि का वार ज्ञात करने हेतु निम्न सूत्र का प्रयोग करते हैं-
वार = तिथि + माह का कोड + वर्ष + शताब्दी का कोड + लीप वर्ष का कोड / 7

उपर्युक्त सूत्र में प्रयुक्त कोड निम्न प्रकार ज्ञात करते हैं।
(1) माह का कोड: एक सामान्य वर्ष एवं लीप वर्ष में महीनों के कोड निम्न प्रकार होते हैं-
सामान्य वर्ष                                                          लीप वर्ष                                      कोड
जनवरी, अप्रैल, जुलाई                                          अप्रैल, जुलाई                               0
अक्टूबर                                                              जनवरी, अक्टूबर                            1
मई                                                                        मई                                             2

फरवरी , अगस्त                                                    अगस्त                                          3

मार्च, नवम्बर                                                        मार्च, नवम्बर, फरवरी                  4

जून                                                                        जून                                             5

सितंबर, दिसंबर                                                  सितंबर, दिसंबर                             6

(2) वर्ष का कोड: जिस वर्ष का वार पूछा गया है, उस वर्ष के अंतिम 2 अंक लेते हैं। उदाहरणार्थ- 2009 के लिए – 09 एवं 1991 के लिए 91 लेंगे।
(3) शताब्दी का कोड: शताब्दी वर्ष में 400 का भाग देकर शेषफल ज्ञात कर लेते हैं। उस शेषफल के निम्म्र कोड हैं-
शेषफल                 0-99                        100-199                 200-299                  300-399
कोड                         6                                  4                             2                             0

(4) लीप वर्ष (अधिवर्ष ) का कोड: वर्ष के अंतिम दो अंकों में 4 का भाग देने पर जो पूर्ण भागफल आता है, वह अधिवर्ष का कोड होता है। भित्रांश/दशमलव भागफल को छोड़ देते हैं।

(5) वार का कोड: सूत्र के अनुसार 7 का भाग देने पर जो शेषफल रहता है, वह दिन (वार) का कोड होता है। जिस दिन का कोड बचा है, अभीष्ट तिथि को वही वार (दिन) होगा। सप्ताह के सातों दिनों के कोड निम्न प्रकार हैं-
वार                       शनि           रवि           सोम           मंगल        बुध            गुरु          शुक्र
कोड                       0               1               2                3             4               5              6

उदाहरणार्थ- मेरा जन्म 2 मार्च, 1962 को हुआ था। उस दिन कौनसा वार था। इसका उत्तर ज्ञात करने हेतु सूत्र के कोड निम्न प्रकार होंगे-
1. तिथि = 2
2. माह का कोड : मार्च = 4
3. वर्ष का कोड – 1962 = 62
4. शताब्दी का कोड- 1900 + 4 = शेषफल 300 का कोड – 0
5. लीप वर्ष का कोड- 1962 में से 62+4-15.5 अतः कोड = 15
वार= तिथि + माह कोड + वर्ष + शताब्दी कोड + लीप वर्ष / 7

= 2 + 4 + 62 + 0 + 15 / 7

= 83 / 7

= 6

= 6 दिन शेषफल 6 कोड शुक्रवार का हे। अतः मेरा  जन्म शुक्रवार को हुआ था।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

DMCA.com Protection Status
Scroll to Top